परिचय
पूर्वोत्तर भारत की हरी-भरी पहाड़ियों, घने जंगलों और भारत-म्यांमार सीमा की दुर्गम चौकियों पर जो वर्दी 19वीं सदी से लगातार तैनात है, वह है Assam Rifles की। यह सिर्फ एक अर्धसैनिक बल नहीं, बल्कि भारत का सबसे पुराना पैरामिलिट्री फोर्स है, जिसे “पूर्वोत्तर के प्रहरी” (Sentinels of the North East) कहा जाता है। जब भी पूर्वोत्तर में शांति, विकास या सीमा सुरक्षा की बात आती है, Assam Rifles का नाम सबसे पहले लिया जाता है।
इस लेख में हम Assam Rifles के इतिहास, संरचना, भूमिका और आज के दौर की चुनौतियों को विस्तार से समझेंगे।
Assam Rifles क्या है?
Assam Rifles भारत का सबसे पुराना अर्धसैनिक बल (Central Armed Police Force से अलग एक विशिष्ट बल) है, जो मुख्य रूप से पूर्वोत्तर भारत में आंतरिक सुरक्षा, सीमा प्रबंधन तथा विद्रोह विरोधी (Counter Insurgency) अभियानों के लिए जाना जाता है।
यह बल प्रशासनिक रूप से गृह मंत्रालय (MHA) के अधीन कार्य करता है, जबकि इसका संचालन (Operational Control) भारतीय सेना के माध्यम से किया जाता है। यही इसकी सबसे बड़ी विशेषता है।



इतिहास
1835 में हुई शुरुआत
Assam Rifles की शुरुआत वर्ष 1835 में अंग्रेजों द्वारा Cachar Levy नामक एक छोटे सैन्य दल के रूप में की गई थी।
उस समय इसका उद्देश्य था—
- चाय बागानों की सुरक्षा
- व्यापारिक मार्गों की रक्षा
- स्थानीय अशांति को नियंत्रित करना
समय के साथ इसका विस्तार होता गया।
नाम में कई बार बदलाव
इतिहास के दौरान इस बल का नाम कई बार बदला गया।
| वर्ष | नाम |
|---|---|
| 1835 | Cachar Levy |
| 1883 | Frontier Police |
| 1891 | Military Police |
| 1917 | Assam Military Police |
| 1920 | Assam Rifles |
आज यह पूरे देश में Assam Rifles के नाम से जानी जाती है।
Assam Rifles का आदर्श वाक्य (Motto)
Sentinels of the North East
अर्थात—
“पूर्वोत्तर भारत के प्रहरी”
यह केवल एक नारा नहीं बल्कि इस बल की वास्तविक जिम्मेदारी को दर्शाता है
Assam Rifles : संरचना
इस अर्धसैनिक बल की सबसे दिलचस्प बात यह है कि यह भारत का इकलौता ऐसा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल है, जिसका प्रशासनिक नियंत्रण गृह मंत्रालय के पास है, लेकिन परिचालन कमान भारतीय सेना के हाथों में है। यही वजह है कि इसे Rashtriya Rifles की तरह सेना और पुलिस के बीच की एक कड़ी माना जाता है।
बल का मुख्यालय दिल्ली में नहीं, बल्कि शिलॉन्ग में स्थित है — यह अन्य केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों से इसे अलग बनाता है। इसकी संरचना इस प्रकार है:
- महानिदेशक मुख्यालय (HQ DGAR) — शिलॉन्ग में स्थित, नेतृत्व लेफ्टिनेंट जनरल स्तर के अधिकारी के हाथों में।
- 3 इंस्पेक्टोरेट जनरल मुख्यालय — मेजर जनरल रैंक के अधिकारियों की कमान में।
- 12 सेक्टर मुख्यालय — ब्रिगेडियर रैंक के अधिकारियों द्वारा संचालित।
- 46 बटालियन और एक प्रशिक्षण केंद्र — कुल स्वीकृत संख्या लगभग 65,000 से अधिक जवानों की है।
वर्तमान में Assam Rifles के 22वें महानिदेशक के तौर पर लेफ्टिनेंट जनरल विकास लखेरा कार्यरत हैं, जिन्होंने लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) पीसी नायर से यह ज़िम्मेदारी संभाली। वे 1990 में 4 सिख लाइट इन्फैंट्री में कमीशन हुए थे और भारतीय सेना में कई महत्वपूर्ण पदों पर सेवा दे चुके हैं।
Assam Rifles किन राज्यों में तैनात रहती है?
मुख्य रूप से—
- अरुणाचल प्रदेश
- नागालैंड
- मणिपुर
- मिजोरम
- त्रिपुरा
- मेघालय
- असम
- सिक्किम के कुछ क्षेत्र
इसके अलावा आवश्यकता पड़ने पर अन्य राज्यों में भी इसकी तैनाती की जा सकती है।
Assam Rifles की मुख्य भूमिकाएँ
Assam Rifles की भूमिका बेहद व्यापक है और यह पूर्वोत्तर भारत की सुरक्षा और विकास दोनों में योगदान देता है:
- भारत-म्यांमार सीमा की सुरक्षा — 2002 से यह बल भारत-म्यांमार सीमा की निगरानी की मुख्य ज़िम्मेदारी निभा रहा है।
- उग्रवाद-रोधी अभियान — पूर्वोत्तर के विभिन्न राज्यों में सक्रिय उग्रवादी संगठनों के खिलाफ लगातार अभियान चलाना।
- कानून-व्यवस्था में सहयोग — नागरिक प्रशासन और राज्य पुलिस की मदद करना।
- आपदा राहत कार्य — प्राकृतिक आपदाओं के समय राहत और बचाव अभियान चलाना।
- चिकित्सा और शिक्षा सहायता — दूरदराज़ इलाकों में चिकित्सा शिविर और शैक्षणिक सहायता उपलब्ध कराना।
- युद्धकालीन भूमिका — ज़रूरत पड़ने पर युद्ध के दौरान पिछले इलाकों की सुरक्षा में सेना की सहायता करना।
Assam Rifles की विशेषताएँ
- भारत का सबसे पुराना अर्धसैनिक बल
- भारतीय सेना के साथ संयुक्त संचालन
- जंगल युद्ध (Jungle Warfare) में विशेषज्ञता
- पर्वतीय क्षेत्रों में संचालन का लंबा अनुभव
- सीमा सुरक्षा और आंतरिक सुरक्षा दोनों की जिम्मेदारी
Assam Rifles की भर्ती कैसे होती है?
Assam Rifles समय-समय पर विभिन्न पदों पर भर्ती निकालती है।
मुख्य पद—
- Rifleman
- Havildar
- Warrant Officer
- Clerk
- Tradesman
- Cook
- Safai Karmchari
- Nursing Assistant
- Religious Teacher
चयन प्रक्रिया
भर्ती में सामान्यतः शामिल होते हैं—
- Physical Standard Test (PST)
- Physical Efficiency Test (PET)
- Written Examination
- Skill Test (कुछ पदों के लिए)
- Medical Examination
- Document Verification
शारीरिक मानदंड
पद के अनुसार मानदंड अलग-अलग हो सकते हैं।
सामान्यतः—
- Height
- Chest (पुरुष)
- Running
- Long Jump
- Medical Fitness
महिला उम्मीदवारों के लिए भी अलग मानदंड निर्धारित किए जाते हैं।
Assam Rifles की ट्रेनिंग
इस बल के जवानों को अत्यंत कठिन प्रशिक्षण दिया जाता है।
मुख्य प्रशिक्षण—
- Jungle Warfare
- Counter Insurgency
- Weapon Training
- Physical Fitness
- Survival Training
- Border Patrolling
- Communication Skills
इसी प्रशिक्षण की वजह से Assam Rifles दुनिया के सबसे अनुभवी जंगल युद्ध बलों में गिनी जाती है।
Assam Rifles और CRPF अंतर
अक्सर आम लोग CRPF और Assam Rifles को एक जैसा समझ लेते हैं, जबकि दोनों की स्थापना, कमान संरचना और भूमिका में स्पष्ट अंतर है। नीचे दी गई तालिका से यह फर्क आसानी से समझा जा सकता है:
| बिंदु | Assam Rifles | CRPF |
|---|---|---|
| स्थापना वर्ष | 1835 | 1939 (1949 में नामकरण) |
| परिचालन नियंत्रण | भारतीय सेना | गृह मंत्रालय |
| मुख्यालय | शिलॉन्ग | नई दिल्ली |
| मुख्य भूमिका | पूर्वोत्तर सीमा सुरक्षा, भारत-म्यांमार सीमा | आंतरिक सुरक्षा, नक्सल-रोधी अभियान |
| नेतृत्व | लेफ्टिनेंट जनरल (भारतीय सेना) | महानिदेशक (IPS अधिकारी) |
| विशेष पहचान | “Sentinels of the North East” | “Chalte Raho Pyare Force” |
Assam Rifles से जुड़े रोचक तथ्य
- ✔ भारत का सबसे पुराना अर्धसैनिक बल है।
- ✔ इसकी स्थापना 1835 में हुई थी।
- ✔ इसका मुख्यालय शिलांग (मेघालय) में है।
- ✔ भारत-म्यांमार सीमा की सुरक्षा करती है।
- ✔ भारतीय सेना के साथ मिलकर ऑपरेशन चलाती है।
- ✔ इसे “Sentinels of the North East” कहा जाता है।
- ✔ जंगल युद्ध में इसकी विशेषज्ञता विश्व स्तर पर मानी जाती है।
आज के दौर की चुनौतियाँ
Assam Rifles के सामने आज कई तरह की चुनौतियाँ हैं, जो इसके काम को और जटिल बनाती हैं:
- म्यांमार सीमा पर बढ़ती अस्थिरता — म्यांमार में आंतरिक संघर्ष के कारण सीमा पार से घुसपैठ और तस्करी जैसी समस्याएँ बढ़ी हैं।
- दोहरी कमान संरचना — प्रशासनिक नियंत्रण गृह मंत्रालय और परिचालन नियंत्रण सेना के पास होने से समन्वय संबंधी चुनौतियाँ सामने आती रहती हैं।
- दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियाँ — घने जंगलों और पहाड़ी इलाकों में तैनाती जवानों के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से कठिन होती है।
- स्थानीय समुदायों का विश्वास जीतना — उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में स्थानीय आबादी के साथ भरोसे का रिश्ता बनाए रखना एक सतत चुनौती है।
इन चुनौतियों के बावजूद, Assam Rifles ने पूर्वोत्तर भारत में शांति स्थापित करने और भारत की “एक्ट ईस्ट नीति” को मज़बूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
निष्कर्ष: क्यों खास है Assam Rifles?
Assam Rifles सिर्फ भारत का सबसे पुराना अर्धसैनिक बल ही नहीं, बल्कि सेना और नागरिक प्रशासन के बीच एक अनोखा सेतु भी है। लगभग दो सदियों के इतिहास में इस बल ने पूर्वोत्तर भारत की सुरक्षा, विकास और शांति में जो योगदान दिया है, वह किसी भी अन्य बल से कम नहीं है। आज जब पूर्वोत्तर भारत भू-राजनीतिक रूप से और भी महत्वपूर्ण होता जा रहा है, Assam Rifles की भूमिका पहले से कहीं अधिक अहम हो गई है।
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